BRICS में मोदी-पुतिन-जिनपिंग की तिकड़ी क्यों चर्चा में है?

Written by: Sumit Pandey

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Aditika

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BRICS भारत की मेजबानी में आयोजित BRICS Summit 2026 ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया व्यापार, टैरिफ, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को लेकर बड़े बदलावों से गुजर रही है। BRICS अब 11 सदस्य देशों वाला समूह है और वैश्विक आबादी तथा अर्थव्यवस्था में इसका बड़ा हिस्सा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 11 सितंबर को अहम बातचीत हुई है। दोनों देशों ने ऊर्जा, रक्षा और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की। भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को करीब 70 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य भी रखा है।

Trump और Tariff का मुद्दा क्यों फिर गर्म हुआ?

BRICS Summit 2026 में व्यापार और टैरिफ का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि BRICS के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक प्रमुखों ने अमेरिकी टैरिफ समेत एकतरफा व्यापार एवं वित्तीय उपायों पर चिंता जताई है। BRICS देशों के वित्त प्रमुखों ने IMF और World Bank जैसी वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में सुधार की मांग की है। साथ ही सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।  BRICS

यही वजह है कि BRICS की गतिविधियों को अमेरिका की मौजूदा व्यापार नीति के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, अभी ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं है कि मोदी-पुतिन-जिनपिंग की बैठक के जवाब में ट्रंप ने नया टैरिफ लगाने का फैसला कर लिया है।

क्या Trump फिर बढ़ा सकते हैं Tariff?

यह सवाल फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में है, लेकिन अभी इसे पक्की खबर की तरह पेश करना सही नहीं होगा। ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति में टैरिफ एक महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक हथियार रहा है, इसलिए BRICS की ओर से अमेरिकी टैरिफ और डॉलर-आधारित वित्तीय व्यवस्था को लेकर बढ़ती चर्चा पर अमेरिका की प्रतिक्रिया पर नजर बनी रहेगी।

भारत के लिए यह मामला और संवेदनशील है क्योंकि नई दिल्ली एक तरफ अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा संबंधों को भी जारी रखे हुए है। हालिया मोदी-पुतिन बैठक इसी संतुलन की अहम मिसाल है।

इसलिए अगर भविष्य में अमेरिकी प्रशासन किसी देश या खास उत्पाद पर टैरिफ बढ़ाता है, तो उसके पीछे केवल BRICS Summit को कारण मानना जल्दबाजी होगी। टैरिफ फैसले व्यापार घाटे, बाजार पहुंच, रणनीतिक हितों और द्विपक्षीय वार्ता जैसे कई मुद्दों से जुड़े हो सकते हैं।

मोदी-पुतिन-जिनपिंग की मुलाकात से अमेरिका को क्या संदेश?

इस मुलाकात का सबसे बड़ा संदेश यह है कि भारत अपनी विदेश नीति में किसी एक शक्ति-समूह पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग बड़े देशों के साथ अपने रणनीतिक हितों को साधना चाहता है।

भारत के रूस के साथ मजबूत ऊर्जा संबंध हैं। चीन के साथ सीमा और व्यापार जैसे जटिल मुद्दे हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच संवाद की जरूरत भी बनी हुई है। अमेरिका भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक और व्यापारिक साझेदार है।

इस तरह भारत की नीति को एक तरह के strategic balancing के रूप में देखा जा सकता है।

BRICS क्या अमेरिका विरोधी संगठन बन रहा है?

ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा। BRICS में शामिल देशों के हित एक जैसे नहीं हैं। समूह में भारत, चीन, रूस, ईरान, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका समेत अलग-अलग आर्थिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं वाले देश हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार BRICS में अमेरिका और पश्चिमी वित्तीय व्यवस्था के विकल्पों पर चर्चा जरूर बढ़ रही है, लेकिन समूह के भीतर भी कई मतभेद हैं। चीन और भारत के बीच अपने रणनीतिक मतभेद हैं और सभी सदस्य BRICS को औपचारिक रूप से पश्चिम-विरोधी गठबंधन में बदलने के पक्ष में नहीं हैं।

इसलिए BRICS को फिलहाल एक ऐसे मंच के रूप में देखना ज्यादा उचित है, जहां उभरती अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक शासन, व्यापार और वित्तीय व्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

भारत के लिए BRICS Summit 2026 क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत के लिए यह सम्मेलन केवल कूटनीतिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है। नई दिल्ली सप्लाई चेन, स्टार्टअप, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल भुगतान और आर्थिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में ठोस पहल को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।BRICS Startup Innovation Fund, Incubator Network और Logistics Supply-Chain Cooperation Framework जैसे प्रस्तावों पर भी काम चल रहा है।

अगर इन पहलों को वास्तविक रूप दिया जाता है, तो भारत के लिए व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

क्या BRICS से डॉलर को चुनौती मिलेगी?

BRICS देशों में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को लेकर चर्चा जरूर बढ़ रही है। वित्त प्रमुखों ने भी सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है।

लेकिन डॉलर को तुरंत खत्म करने या वैश्विक व्यापार से बाहर करने जैसी स्थिति अभी दूर है। इसके लिए सदस्य देशों के बीच मजबूत वित्तीय समन्वय, भरोसेमंद भुगतान प्रणाली और बड़े पैमाने पर आर्थिक एकीकरण की जरूरत होगी।

भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या पड़ेगा असर?

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह BRICS में रूस और चीन के साथ सहयोग बढ़ाते हुए अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को भी संतुलित रखे। अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंध बहुत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में नई दिल्ली का लक्ष्य टकराव बढ़ाने के बजाय बातचीत और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

BRICS

दूसरी ओर, रूस के साथ भारत का ऊर्जा संबंध भी काफी महत्वपूर्ण है। Reuters के अनुसार 2026 में भारत के कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी एक समय 51% तक पहुंच गई थी।

क्या भारत पर फिर बढ़ सकता है अमेरिकी Tariff?

फिलहाल ऐसा कोई पुष्ट निर्णय सामने नहीं है कि BRICS Summit के कारण भारत पर नया अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा रहा है। इसलिए सोशल मीडिया या अनधिकृत रिपोर्टों में किए जा रहे दावों को आधिकारिक घोषणा के बिना सच नहीं मानना चाहिए।

हां, अगर भविष्य में अमेरिका BRICS, रूस से ऊर्जा खरीद या किसी अन्य व्यापारिक मुद्दे को लेकर नए शुल्क लगाने का फैसला करता है, तो भारतीय निर्यातकों और अमेरिकी बाजार पर उसका असर पड़ सकता है।

(FAQs)

1. BRICS Summit 2026 में मोदी, पुतिन और जिनपिंग की मुलाकात क्यों महत्वपूर्ण है?
मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तीनों देशों के आर्थिक, ऊर्जा, सुरक्षा और कूटनीतिक हित वैश्विक राजनीति पर असर डालते हैं। भारत इस समय BRICS की मेजबानी कर रहा है और चीन-रूस के साथ संबंधों को संतुलित रखते हुए अमेरिका के साथ भी अपने रिश्ते बनाए रखना चाहता है।

2. क्या BRICS की वजह से Donald Trump फिर Tariff बढ़ा सकते हैं?
फिलहाल ऐसा कोई पुष्ट फैसला सामने नहीं आया है कि BRICS Summit के कारण Trump प्रशासन भारत या अन्य देशों पर नया Tariff लगाने जा रहा है। हालांकि, BRICS में स्थानीय मुद्राओं और वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बढ़ती चर्चा को अमेरिका करीब से देख रहा है।

3. क्या BRICS अमेरिका विरोधी संगठन बन रहा है?
BRICS में कुछ देश अमेरिकी नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की वकालत करते हैं, लेकिन पूरे समूह को एकसमान अमेरिका-विरोधी गठबंधन कहना सही नहीं होगा। सदस्य देशों के आर्थिक और रणनीतिक हित अलग-अलग हैं और भारत भी BRICS को खुले तौर पर किसी पश्चिम-विरोधी सैन्य या राजनीतिक गठबंधन के रूप में नहीं देखता।

4. BRICS में Dollar को लेकर क्या चर्चा हो रही है?
BRICS देशों में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा हो रही है। इसका उद्देश्य व्यापार को आसान बनाना और कुछ मामलों में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना है। हालांकि, इससे तुरंत डॉलर की जगह कोई नई वैश्विक मुद्रा आ जाएगी, ऐसा कहना सही नहीं है।

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Sumit Pandey

Web Content Writer, SEO management, Working with ORBITEK HUB And PATRIKA TIMES with 2 years of experience. where i specializes in creating informative and reader friendly content for audience.

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