Medical Intern Stipend 2026 Big Concern: राज्यों में असमान भुगतान पर क्यों भड़का विरोध?

Written by: Vishnu Pandey

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Aditika

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देश के अलग-अलग राज्यों में लगभग समान चिकित्सकीय जिम्मेदारी निभाने वाले MBBS और BDS इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाले मानदेय में बड़ा अंतर सामने आया है। Medical Intern Stipend 2026 को लेकर जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में हुए विरोध प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय स्तर पर एक समान न्यूनतम स्टाइपेंड की मांग तेज कर दी है।

जम्मू-कश्मीर में इंटर्न डॉक्टरों को ₹12,300 प्रतिमाह मिल रहे हैं, जबकि बिहार ने MBBS इंटर्न का मानदेय बढ़ाकर ₹27,000 कर दिया है। Medical Intern Stipend 2026 का यह अंतर तब अधिक गंभीर दिखाई देता है, जब अलग-अलग राज्यों के इंटर्न लगभग समान प्रकार की OPD, वार्ड, इमरजेंसी, लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर संबंधी जिम्मेदारियां निभाते हैं।

Medical Intern Stipend 2026 को लेकर क्यों हो रहा विरोध?

Medical Intern Stipend 2026 के विरोध का मुख्य कारण केवल कम मानदेय नहीं, बल्कि राज्यों और संस्थानों के बीच इसका भारी अंतर भी है। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि समान मेडिकल डिग्री, समान प्रशिक्षण और लगभग समान कार्य करने के बावजूद उनका भुगतान स्थान के अनुसार बदल जाता है।

जम्मू-कश्मीर में MBBS और BDS इंटर्न ने 31 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन विरोध शुरू किया था। वे ₹12,300 के वर्तमान मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30,000 करने की मांग कर रहे थे। डॉक्टरों ने 24 से 36 घंटे तक चलने वाली ड्यूटी का मुद्दा भी उठाया। सरकार से एक महीने के भीतर संशोधन का आश्वासन मिलने के बाद विरोध स्थगित किया गया।

मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों ने ₹14,337 से बढ़ाकर ₹30,000 प्रतिमाह करने की मांग की थी। आंदोलन के बाद सरकार ने Medical Intern Stipend 2026 में लगभग 50 प्रतिशत बढ़ोतरी स्वीकार की और मानदेय बढ़ाकर करीब ₹21,500 कर दिया।

Medical Intern Stipend 2026 की राज्यवार नई दरें

हाल के निर्णयों के बाद कई राज्यों ने Medical Intern Stipend 2026 की दरों में बढ़ोतरी की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उत्तर प्रदेश ने MBBS और BDS इंटर्न का स्टाइपेंड ₹12,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया है। इस निर्णय से सरकारी मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सा संस्थानों और मेडिकल विश्वविद्यालयों के लगभग 3,928 इंटर्न लाभान्वित होने की संभावना है।

राज्य/केंद्रशासित प्रदेशपहले या मौजूदा भुगतानसंशोधित भुगतान/मांग
जम्मू-कश्मीर₹12,300मांग ₹30,000
मध्य प्रदेश₹14,337लगभग ₹21,500
उत्तर प्रदेश₹12,000₹25,000
उत्तराखंड₹17,000₹25,000
बिहार₹20,000₹27,000
केरल के सरकारी मेडिकल कॉलेजलगभग ₹28,000संस्थानानुसार लागू

यह तुलना बताती है कि Medical Intern Stipend 2026 में अलग-अलग राज्यों के बीच हजारों रुपये का अंतर है। यह आंकड़े मुख्य रूप से सरकारी मेडिकल कॉलेजों से संबंधित हैं। निजी कॉलेजों में वास्तविक भुगतान और कटौतियां इससे अलग हो सकते हैं।

बिहार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों के MBBS इंटर्न का स्टाइपेंड ₹20,000 से बढ़ाकर ₹27,000 किया है। रिपोर्टों के अनुसार बढ़ी हुई राशि का लाभ Foreign Medical Graduate इंटर्न तक भी बढ़ाया गया है। अन्य मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों के लिए भी संशोधन की घोषणा की गई है।

उत्तराखंड सरकार ने Medical Intern Stipend 2026 को ₹17,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रतिमाह करने की मंजूरी दी है। इंटर्न डॉक्टरों की मांग ₹30,000 की थी, लेकिन सरकार के निर्णय के बाद उन्होंने अपना विरोध वापस ले लिया।

Medical Intern Stipend 2026 के बीच लंबी ड्यूटी करती डॉक्टर

Medical Intern Stipend 2026 में असमानता का कारण

Medical Intern Stipend 2026 में असमानता की सबसे बड़ी वजह यह है कि देशभर के लिए एक निश्चित राष्ट्रीय दर लागू नहीं है। National Medical Commission के मौजूदा ढांचे में स्टाइपेंड की राशि संबंधित संस्थान, विश्वविद्यालय, राज्य अथवा सक्षम प्राधिकरण द्वारा निर्धारित की जाती है।इंटर्नशिप और स्टाइपेंड से संबंधित नियमों की विस्तृत जानकारी National Medical Commission की आधिकारिक वेबसाइट पर देखी जा सकती है।

इस व्यवस्था के कारण एक राज्य ₹12,300 देता है तो दूसरा राज्य ₹25,000 या ₹27,000 प्रतिमाह दे सकता है। निजी मेडिकल कॉलेजों में स्थिति और जटिल हो सकती है। कहीं स्टाइपेंड कम मिलता है, कहीं भुगतान में देरी होती है और कुछ संस्थानों में हॉस्टल या अन्य शुल्क काटने के बाद हाथ में मिलने वाली राशि काफी कम रह जाती है।

NMC मेडिकल कॉलेजों को स्टाइपेंड से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश देता है। इसके बावजूद Medical Intern Stipend 2026 के भुगतान, देरी और कटौती से संबंधित शिकायतें सामने आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट भी देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों को स्टाइपेंड न मिलने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।

Medical Intern Stipend 2026 और 36 घंटे की ड्यूटी

Medical Intern Stipend 2026 का मुद्दा लंबे कार्य घंटों से भी जुड़ा है। कई सरकारी अस्पतालों में इंटर्न और पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट को 24 से 36 घंटे तक की ड्यूटी करनी पड़ सकती है। स्टाफ की कमी वाले अस्पतालों में यह दबाव और अधिक बढ़ जाता है।

इंटर्न डॉक्टर OPD, वार्ड, इमरजेंसी विभाग, लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर में काम करते हैं। मरीज की जांच और उपचार में सहायता करने के साथ उन्हें डिस्चार्ज समरी, बीमा संबंधी फॉर्म और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ा कागजी काम भी करना पड़ सकता है।

चिकित्सकों के अनुसार 10 से 12 घंटे की शिफ्ट में चार से पांच घंटे तक प्रशासनिक और लिपिकीय कार्यों में खर्च हो सकते हैं। इसका असर क्लिनिकल प्रशिक्षण पर पड़ता है। Medical Intern Stipend 2026 की बहस में इसलिए केवल वेतन बढ़ाना नहीं, बल्कि काम के घंटों और जिम्मेदारियों का युक्तिसंगत निर्धारण भी शामिल है।

लंबी शिफ्ट के बाद पर्याप्त आराम न मिलने से डॉक्टर की शारीरिक और मानसिक सेहत प्रभावित हो सकती है। थकान मरीज की देखभाल और निर्णय लेने की क्षमता पर भी असर डाल सकती है। इस कारण ड्यूटी रोस्टर में पर्याप्त विश्राम को मरीजों की सुरक्षा से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

Medical Intern Stipend 2026 में खर्च पूरा करना क्यों मुश्किल?

Medical Intern Stipend 2026 प्राप्त करने वाले डॉक्टरों को हॉस्टल, भोजन, यात्रा, किताबें, डिजिटल शिक्षण सामग्री और परीक्षा की तैयारी का खर्च उठाना पड़ता है। कुछ विद्यार्थी शिक्षा ऋण लेकर MBBS पूरा करते हैं और इंटर्नशिप के दौरान परिवार को आर्थिक सहयोग देने की जिम्मेदारी भी उनके ऊपर आ सकती है।

मेडिकल इंटर्नशिप में भोजन का खर्च सामान्य विद्यार्थियों से अधिक हो सकता है, क्योंकि डॉक्टरों की ड्यूटी का समय निश्चित नहीं होता। देर रात या इमरजेंसी ड्यूटी के कारण उन्हें मेस के बजाय बाहर से भोजन लेना पड़ सकता है।

NEET PG की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को अध्ययन सामग्री या कोचिंग पर सालाना हजारों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। कम Medical Intern Stipend 2026 में इन खर्चों को पूरा करना आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण परिवारों से आने वाले डॉक्टरों के लिए अधिक कठिन हो सकता है।

Medical Intern Stipend 2026 में PG डॉक्टरों की चिंता

Medical Intern Stipend 2026 के साथ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल छात्रों और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय का मुद्दा भी सामने आया है। उत्तराखंड में PG मेडिकल छात्रों का स्टाइपेंड लंबे समय से संशोधित नहीं होने की शिकायत की गई है।

इसके विपरीत बिहार सरकार ने PG मेडिकल छात्रों के मानदेय में बढ़ोतरी की है। पहले वर्ष के छात्रों के लिए राशि ₹82,000 से बढ़ाकर ₹92,800 और दूसरे वर्ष के लिए ₹90,200 से बढ़ाकर ₹1,02,000 किए जाने की जानकारी सामने आई है।

MBBS इंटर्न और PG रेजिडेंट की जिम्मेदारियां समान नहीं होतीं, इसलिए दोनों के भुगतान की सीधी तुलना उचित नहीं है। फिर भी Medical Intern Stipend 2026 के आंदोलन ने मेडिकल प्रशिक्षण के प्रत्येक स्तर पर नियमित वेतन संशोधन की आवश्यकता को सामने रखा है।

Medical Intern Stipend 2026 की राज्यवार दरों का तुलनात्मक चित्र

Medical Intern Stipend 2026 पर FORDA की प्रमुख मांगें

Federation of Resident Doctors’ Association ने Medical Intern Stipend 2026 के लिए सरकारी और निजी दोनों संस्थानों में कम से कम ₹30,000 प्रतिमाह की राष्ट्रीय न्यूनतम दर तय करने की मांग की है।

संगठन की प्रमुख मांगों में निम्न बिंदु शामिल हैं:

  • देशभर में MBBS इंटर्न के लिए ₹30,000 का न्यूनतम मासिक स्टाइपेंड
  • सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों पर समान नियम
  • महंगाई के अनुसार स्टाइपेंड का वार्षिक संशोधन
  • भुगतान की जानकारी ऑनलाइन सार्वजनिक करना
  • देरी या भुगतान न होने पर शिकायत निवारण व्यवस्था
  • नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई
  • कार्य के घंटे और आवश्यक विश्राम स्पष्ट रूप से निर्धारित करना

यदि एक समान न्यूनतम दर लागू होती है तो राज्यों को उससे अधिक भुगतान करने की स्वतंत्रता दी जा सकती है। इससे Medical Intern Stipend 2026 में न्यूनतम सुरक्षा सुनिश्चित होगी और बड़े क्षेत्रीय अंतर को कम किया जा सकेगा।

Medical Intern Stipend 2026 विवाद का संभावित समाधान

Medical Intern Stipend 2026 के स्थायी समाधान के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम स्टाइपेंड, समय पर भुगतान और नियमित संशोधन की स्पष्ट व्यवस्था आवश्यक है। इसके साथ प्रत्येक कॉलेज को अपनी वेबसाइट पर भुगतान की निर्धारित राशि और वास्तविक भुगतान की स्थिति प्रकाशित करनी चाहिए।

ऑनलाइन शिकायत पोर्टल के माध्यम से इंटर्न भुगतान में देरी, अनुचित कटौती या स्टाइपेंड न मिलने की शिकायत दर्ज कर सकें। शिकायत की जांच और समाधान की समय-सीमा भी तय होनी चाहिए।

इंटर्न डॉक्टर प्रशिक्षण ले रहे विद्यार्थी होने के साथ स्वास्थ्य व्यवस्था का सक्रिय हिस्सा भी हैं। इसलिए Medical Intern Stipend 2026 तय करते समय जीवन-यापन की लागत, काम के घंटे, मरीजों की जिम्मेदारी और पढ़ाई के खर्च को संतुलित रूप से देखना जरूरी है।

Disclaimer: यह लेख केवल शैक्षणिक जानकारी के लिए है। भुगतान और नियम राज्य तथा संस्थान के अनुसार बदल सकते हैं। नवीनतम विवरण संबंधित सरकारी आदेश और आधिकारिक सूचना से जांचें।

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