HUL Share Crash: शेयर बाजार में कई बार ऐसा होता है कि कंपनी की बिक्री बढ़ने के बावजूद उसका शेयर दबाव में आ जाता है। ऐसा ही कुछ इस बार Hindustan Unilever Ltd (HUL) के साथ देखने को मिला। कंपनी ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी किए, जिसके बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया काफी नकारात्मक रही।
परिणामस्वरूप HUL का शेयर लगभग 7% तक टूट गया और 52 सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। अगर आप HUL के निवेशक हैं या FMCG सेक्टर में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि आखिर अच्छे रेवेन्यू के बावजूद शेयर में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई।
Q1 FY27 के बाद HUL शेयर में बड़ी गिरावट

मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर HUL का शेयर करीब 7% गिरकर ₹2,021.50 तक पहुंच गया, जो पिछले 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। कारोबार के दौरान शेयर लगभग ₹2,022.70 पर ट्रेड करता दिखा।
ध्यान देने वाली बात यह है कि कंपनी का 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर ₹2,750 रहा था, जिसे उसने सितंबर 2025 में छुआ था। इसके मुकाबले अब शेयर में काफी गिरावट देखने को मिली है।
पिछले कुछ समय में कैसा रहा शेयर का प्रदर्शन?
हालिया प्रदर्शन पर नजर डालें तो HUL के शेयर में लगातार कमजोरी देखने को मिली है।
- पिछले 1 सप्ताह में करीब 5% से अधिक की गिरावट।
- पिछले 1 महीने में लगभग 7% की कमजोरी।
- साल 2026 की शुरुआत से अब तक (YTD) करीब 13% की गिरावट।
इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर पड़ा है।
HUL Share Crash: Q1 FY27 रिजल्ट कैसा रहा?
HUL ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मिश्रित नतीजे पेश किए। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 3% घटकर ₹2,673 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹2,756 करोड़ था।
हालांकि कंपनी ने बताया कि इस बार मुनाफे पर एक बार मिलने वाले टैक्स क्रेडिट (One-off Tax Credit) का प्रभाव रहा, जिसकी वजह से लाभ में कमी दिखाई दी।
दूसरी ओर कंपनी की बिक्री मजबूत रही।
- ऑपरेशंस से कुल रेवेन्यू बढ़कर ₹17,341 करोड़ पहुंच गया।
- पिछले साल इसी अवधि में यह ₹15,757 करोड़ था।
- यानी कंपनी ने लगभग 10% सालाना (YoY) राजस्व वृद्धि दर्ज की।
यह दिखाता है कि कंपनी के उत्पादों की मांग बनी हुई है, लेकिन मुनाफे पर लागत और अन्य कारकों का असर पड़ा।
EBITDA और मार्जिन में क्या हुआ?
ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी का प्रदर्शन स्थिर रहा, लेकिन मार्जिन में थोड़ी कमजोरी दिखाई दी। कंपनी का EBITDA लगभग ₹3,947 करोड़ रहा, जबकि EBITDA Margin 23.1% से घटकर 22.76% पर आ गया। हालांकि कंपनी का कहना है कि चुनौतीपूर्ण और अस्थिर कारोबारी माहौल के बावजूद मार्जिन उसकी तय गाइडेंस के भीतर बना हुआ है।
कंपनी ने दर्ज की 13 तिमाहियों की सबसे तेज ग्रोथ
दिलचस्प बात यह है कि HUL ने बताया कि उसने पिछले 13 क्वार्टर की सबसे मजबूत ग्रोथ दर्ज की है।
इसके पीछे मुख्य कारण रहे:
- Underlying Sales Growth (USG): 10%
- Underlying Volume Growth (UVG): 5%
- कुल कारोबार (Turnover): ₹17,184 करोड़
यानी कंपनी की वास्तविक बिक्री और वॉल्यूम दोनों में अच्छी बढ़ोतरी हुई।
कौन-से बिजनेस सेगमेंट ने बेहतर प्रदर्शन किया?
होम केयर
होम केयर कारोबार ने शानदार प्रदर्शन किया। इस सेगमेंट में 14% USG दर्ज हुई। फैब्रिक वॉश, डिटर्जेंट पाउडर, बार और लिक्विड कैटेगरी में अच्छी मांग देखने को मिली। खासकर लिक्विड उत्पादों की डबल डिजिट ग्रोथ जारी रही।
ब्यूटी एंड वेलबीइंग
यह सेगमेंट भी कंपनी के लिए मजबूत साबित हुआ। यहां 12% USG दर्ज की गई। प्रीमियम हेयर केयर उत्पादों की मांग बढ़ी और कंपनी ने अपनी बाजार हिस्सेदारी को और मजबूत किया।
पर्सनल केयर
पर्सनल केयर कारोबार में 4% USG दर्ज हुई। पाम ऑयल की लगातार बढ़ती कीमतों का असर इस बिजनेस पर पड़ा। इसके बावजूद प्रीमियम साबुन, बॉडीवॉश और ओरल केयर कैटेगरी में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली। Closeup White Now, Pepsodent Gum Care और Sensitive Care जैसे प्रीमियम उत्पादों की बिक्री में सुधार दर्ज किया गया।
फूड्स बिजनेस
फूड्स सेगमेंट ने 7% USG हासिल की। कॉफी कारोबार में डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिली। वहीं कंपनी ने अपने प्रीमियम पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए Bru Southern Trails Coffee, Red Label Instant Tea और Kissan Chutney के नए वैरिएंट भी लॉन्च किए।
फिर भी शेयर क्यों गिरा?
कई निवेशकों के मन में यह सवाल है कि जब कंपनी की बिक्री बढ़ी और अधिकांश सेगमेंट अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, तब शेयर क्यों टूट गया?
इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
- नेट प्रॉफिट में 3% की गिरावट।
- EBITDA Margin में कमी।
- महंगाई और कच्चे माल की बढ़ती लागत का दबाव।
- निवेशकों की उम्मीदें वास्तविक नतीजों से अधिक थीं।
- बाजार ने भविष्य की कमाई को लेकर सतर्क रुख अपनाया।
यही वजह रही कि अच्छे रेवेन्यू के बावजूद शेयर में तेज बिकवाली देखने को मिली।
कंपनी का मार्केट कैप कितना है?

28 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, Hindustan Unilever Ltd का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग ₹4.75 लाख करोड़ है। यह भारत की सबसे बड़ी FMCG कंपनियों में से एक बनी हुई है।
आगे निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
HUL लंबे समय से मजबूत ब्रांड, स्थिर बिजनेस मॉडल और लगातार डिविडेंड देने वाली कंपनियों में गिनी जाती है। हालांकि अल्पकाल में कच्चे माल की लागत, मार्जिन पर दबाव और बाजार की उम्मीदों का असर शेयर पर देखने को मिल सकता है। आने वाली तिमाहियों में निवेशकों की नजर कंपनी के मार्जिन, प्रॉफिट ग्रोथ, ग्रामीण मांग और प्रीमियम उत्पादों की बिक्री पर रहेगी।
FAQ
1. HUL का शेयर 52 सप्ताह के निचले स्तर पर क्यों पहुंचा?
Q1 FY27 के नतीजों के बाद नेट प्रॉफिट में गिरावट, मार्जिन में कमी और निवेशकों की उम्मीदों से कमजोर प्रदर्शन के कारण शेयर में तेज बिकवाली हुई।
2. HUL का Q1 FY27 नेट प्रॉफिट कितना रहा?
कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹2,673 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में लगभग 3% कम है।
3. क्या HUL की बिक्री बढ़ी है?
हाँ। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू लगभग 10% बढ़कर ₹17,341 करोड़ पहुंच गया।
4. HUL के किस बिजनेस सेगमेंट ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया?
होम केयर और ब्यूटी एंड वेलबीइंग सेगमेंट ने सबसे मजबूत ग्रोथ दर्ज की, जबकि कॉफी और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मांग भी अच्छी रही।
5. क्या HUL अभी भी भारत की बड़ी FMCG कंपनियों में शामिल है?
हाँ। लगभग ₹4.75 लाख करोड़ के मार्केट कैप के साथ HUL भारत की सबसे बड़ी FMCG कंपनियों में से एक है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी को निवेश सलाह या शेयर खरीदने अथवा बेचने की सिफारिश न मानें। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।
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