Pradosh Vrat 2026: जनवरी का आखिरी शुक्र प्रदोष शिव भक्ति से मिलेगा लक्ष्मी कृपा का वरदान

Written by: Aditi

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Aditika

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अगर आप शिव भक्ति से जुड़ा कोई व्रत खोज रहे हैं, जो सिर्फ आस्था ही नहीं बल्कि जीवन में स्थिरता और धन-सुख का रास्ता भी दिखाए, तो जनवरी 2026 का आखिरी प्रदोष व्रत आपके लिए खास हो सकता है। साल की शुरुआत में आने वाला यह व्रत सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि एक ऐसा विश्वास है जो सदियों से लोगों को मानसिक शांति और आर्थिक संतुलन की उम्मीद देता आया है। आज हम बात कर रहे हैं Pradosh Vrat 2026 की, जिसे इस बार “लक्ष्मी कृपा पाने का व्रत” कहा जा रहा है।

प्रदोष व्रत 2026 शिव कृपा और जीवन संतुलन का विशेष अवसर

प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक प्राचीन व्रत है। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत शरीर, मन और जीवन से जुड़े कष्टों को धीरे-धीरे दूर करता है। Pradosh Vrat 2026 में जनवरी का आखिरी प्रदोष खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह शुक्रवार को पड़ रहा है। शुक्रवार का संबंध माता लक्ष्मी से है, इसलिए इसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है।

Pradosh Vrat 2026: जनवरी का आखिरी शुक्र प्रदोष शिव भक्ति से मिलेगा लक्ष्मी कृपा का वरदान
Pradosh Vrat 2026: जनवरी का आखिरी शुक्र प्रदोष शिव भक्ति से मिलेगा लक्ष्मी कृपा का वरदान

इस दिन की पूजा में सिर्फ शिव भक्ति ही नहीं, बल्कि धन, वैभव और स्थिर आय की कामना भी जुड़ जाती है। अनुभवी पंडितों के अनुसार जब प्रदोष व्रत शुक्रवार को आता है, तब शिव और लक्ष्मी दोनों की कृपा एक साथ मिलती है। यही कारण है कि इस व्रत को अपार धन प्राप्ति से जोड़कर देखा जाता है।

आज के समय में जब लोग तनाव, अस्थिर करियर और आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं, तब Pradosh Vrat 2026 जैसे व्रत उन्हें एक मानसिक सहारा देते हैं। यह व्रत सिर्फ पूजा-पाठ नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और धैर्य का अभ्यास भी है, जो लंबे समय तक असर दिखाता है।

प्रदोष व्रत कब है 2026 तिथि वार और शुभ योग

अब सबसे अहम सवाल, प्रदोष व्रत कब है। Pradosh Vrat 2026 में यह व्रत 30 जनवरी 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि सुबह 11 बजकर 9 मिनट तक रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी। प्रदोष व्रत हमेशा त्रयोदशी तिथि में रखा जाता है, इसलिए यह दिन पूर्ण रूप से शुभ माना जा रहा है।

इस दिन चंद्रमा मिथुन राशि में गोचर करेंगे और नक्षत्र आर्द्रा रहेगा, जिसका प्रभाव 31 जनवरी की सुबह 3 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में यह योग कर्म और प्रयास से जुड़े फलों को मजबूत करता है। इसका अर्थ है कि इस दिन की गई पूजा और संकल्प का असर लंबे समय तक बना रहता है।

शुक्रवार को होने के कारण यह Pradosh Vrat 2026 आर्थिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस दिन भगवान शिव की आराधना के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन आगमन के नए मार्ग खुलते हैं और रुके हुए कार्य आगे बढ़ते हैं।

शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व क्यों जुड़ता है लक्ष्मी कृपा से

शुक्र प्रदोष को सामान्य प्रदोष से अलग माना जाता है। शुक्रवार का स्वामी शुक्र ग्रह होता है, जो सुख, संपत्ति और भौतिक आराम का कारक माना गया है। जब Pradosh Vrat 2026 शुक्रवार को आता है, तब यह व्रत शिव और शुक्र ग्रह दोनों की ऊर्जा को जोड़ देता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शिव पूजा करने से जीवन के रोग, कर्ज और मानसिक दबाव कम होते हैं। वहीं लक्ष्मी पूजा करने से आय के स्रोत मजबूत होते हैं। यही वजह है कि इसे लक्ष्मी कृपा पाने का व्रत कहा जाता है।

अनुभव बताता है कि जो लोग नियमित रूप से शुक्र प्रदोष का पालन करते हैं, उनके जीवन में धीरे-धीरे स्थिरता आती है। यह कोई चमत्कारिक दावा नहीं, बल्कि आस्था और अनुशासन का परिणाम माना जाता है। Pradosh Vrat 2026 में यह अवसर साल की शुरुआत में मिल रहा है, इसलिए इसे भविष्य की नींव मजबूत करने का व्रत भी कहा जा सकता है।

प्रदोष व्रत पूजा विधि और 2026 की नई अपडेट

प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा प्रदोष काल में की जाती है, यानी सूर्यास्त के बाद का समय। Pradosh Vrat 2026 में शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है। शुक्रवार होने के कारण माता लक्ष्मी को कमल या सफेद फूल अर्पित करें।

2026 की नई धार्मिक अपडेट्स के अनुसार इस बार कई मंदिरों में सामूहिक प्रदोष आरती और ऑनलाइन दर्शन की सुविधा भी बढ़ाई जा रही है। यह उन लोगों के लिए राहत है जो समय या दूरी के कारण मंदिर नहीं जा पाते।

Pradosh Vrat 2026: जनवरी का आखिरी शुक्र प्रदोष शिव भक्ति से मिलेगा लक्ष्मी कृपा का वरदान
Pradosh Vrat 2026: जनवरी का आखिरी शुक्र प्रदोष शिव भक्ति से मिलेगा लक्ष्मी कृपा का वरदान

आज के डिजिटल दौर में Pradosh Vrat 2026 सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं रहा। लोग घर पर शांत मन से पूजा करके भी वही भाव और ऊर्जा महसूस कर रहे हैं। यही इस व्रत की सबसे बड़ी ताकत है, यह समय के साथ खुद को ढाल लेता है और फिर भी अपनी मूल आस्था बनाए रखता है।

Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और ज्योतिषीय जानकारियों पर आधारित है। व्रत, पूजा या ज्योतिष से जुड़े निर्णय व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करते हैं। किसी भी प्रकार के आर्थिक, स्वास्थ्य या जीवन संबंधी फैसले के लिए विशेषज्ञ की सलाह अवश्य

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