Grain ATM Bihar: बिहार की राशन व्यवस्था में टेक्नोलॉजी की नई शुरुआत

Written by: Aditi

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Aditika

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अगर आप भी कभी सरकारी राशन की दुकान पर लंबी लाइन, कम तौल या समय की परेशानी से गुज़रे हैं, तो यह खबर आपको राहत देने वाली लगेगी। बिहार में अब सरकारी राशन लेने का तरीका बदलने जा रहा है। बिल्कुल बैंक एटीएम की तरह अब अनाज भी मशीन से मिलेगा। इस नई व्यवस्था का नाम है Grain ATM Bihar, जो राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को ज्यादा भरोसेमंद और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

सरकार की योजना है कि सबसे पहले पटना में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत की जाए। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले समय में पूरे बिहार की तस्वीर बदल सकती है। यह सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के रोज़मर्रा के भरोसे से जुड़ा बदलाव है।

Grain ATM Bihar क्या है और यह कैसे काम करता है

Grain ATM Bihar असल में एक ऑटोमैटिक मशीन है, जो बैंक एटीएम की तरह काम करती है, लेकिन इसमें पैसे नहीं, बल्कि चावल, गेहूं और दाल जैसे अनाज मिलते हैं। लाभार्थी को मशीन में अपनी राशन कार्ड की जानकारी डालनी होती है। इसके बाद आधार से लिंक बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट के ज़रिए पहचान होती है।

Grain ATM Bihar: बिहार की राशन व्यवस्था में टेक्नोलॉजी की नई शुरुआत
Grain ATM Bihar: बिहार की राशन व्यवस्था में टेक्नोलॉजी की नई शुरुआत

जैसे ही सत्यापन पूरा होता है, मशीन लाभार्थी के तय हिस्से का अनाज खुद तौलकर बाहर निकाल देती है। पूरी प्रक्रिया में ज्यादा समय नहीं लगता। बताया गया है कि यह मशीन सिर्फ पांच मिनट में करीब 50 किलो तक अनाज देने की क्षमता रखती है।

खास बात यह है कि यह मशीन 24 घंटे काम कर सकती है, जिससे समय की पाबंदी भी खत्म हो जाएगी।यह सिस्टम पूरी तरह डिजिटल है। इसलिए तौल में गड़बड़ी, रजिस्टर में हेराफेरी और शिकायतों की गुंजाइश काफी कम हो जाती है।

पटना से पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत क्यों अहम है

Grain ATM Bihar की शुरुआत पटना शहरी क्षेत्र से की जा रही है। यहां तीन जगहों पर ग्रेन एटीएम लगाने का प्रस्ताव है और बहुत जल्द इनके लिए स्थान भी तय कर लिए जाएंगे। योजना के मुताबिक, एक से दो महीने के भीतर आम लोगों को मशीन से राशन मिलने लगेगा।

पटना को पायलट प्रोजेक्ट के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां तकनीकी संसाधन, इंटरनेट कनेक्टिविटी और निगरानी की व्यवस्था बेहतर है। इससे सरकार को यह समझने में आसानी होगी कि मशीन जमीनी स्तर पर कितनी कारगर है और किन सुधारों की जरूरत है।

अगर पटना का प्रयोग सफल रहता है, तो इसे पूरे बिहार में लागू किया जाएगा। इसका सीधा फायदा करीब आठ करोड़ राशन कार्डधारकों को मिलेगा।

खर्च और जिम्मेदारी केंद्र और राज्य की भूमिका

इस योजना में खर्च और जिम्मेदारी को साफ तौर पर बांटा गया है। केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, विश्व खाद्य कार्यक्रम यानी WFP ग्रेन एटीएम मशीनों की खरीद, स्थापना, एक साल की वारंटी और एक साल के रखरखाव का खर्च उठाएगा।

वहीं, राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी मशीन लगाने के लिए जगह तैयार करना, बिजली और इंटरनेट की व्यवस्था करना, सीसीटीवी और सुरक्षा इंतज़ाम करना और जरूरी मानव संसाधन तैनात करना।

आसान शब्दों में कहें तो तकनीक से जुड़ा खर्च केंद्र से जुड़े संस्थान संभालेंगे और संचालन की जिम्मेदारी बिहार सरकार के पास रहेगी। यह साझेदारी इस योजना को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने में मदद करेगी।

राशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव क्यों माना जा रहा है Grain ATM Bihar

Grain ATM Bihar को राशन व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इससे कई पुरानी समस्याओं का समाधान एक साथ होता है। लाइन में लगने की मजबूरी कम होगी। मशीन तय मात्रा में अनाज देती है, इसलिए वजन में गड़बड़ी की शिकायतें लगभग खत्म हो जाएंगी।

चोरी और कालाबाजारी पर भी लगाम लगेगी, क्योंकि पूरा सिस्टम डिजिटल और बायोमेट्रिक आधारित है। हर ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड रहेगा। सबसे अहम बात यह है कि लाभार्थी को उसका हक सीधे मिलेगा, बिना किसी बिचौलिए या दबाव के।
यह बदलाव सिर्फ सुविधा का नहीं, बल्कि भरोसे का भी है। इससे लोगों का सिस्टम पर विश्वास मजबूत होगा।

देश में चौथे राज्य के रूप में बिहार की एंट्री

ओडिशा, राजस्थान और हरियाणा के बाद बिहार देश का चौथा राज्य बनने जा रहा है, जहां ग्रेन एटीएम से राशन वितरण शुरू होगा। इन राज्यों के अनुभव बताते हैं कि तकनीक आधारित वितरण प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ी है और शिकायतें घटी हैं।

Grain ATM Bihar के जरिए राज्य की पहचान एक आधुनिक और सुधारवादी व्यवस्था वाले प्रदेश के रूप में बनेगी। यह कदम भविष्य में स्मार्ट PDS सिस्टम की नींव रख सकता है, जहां तकनीक और जनकल्याण साथ-साथ चलें।

भविष्य की तस्वीर लंबे समय तक असर डालने वाली योजना

यह योजना सिर्फ आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। बढ़ती आबादी, शहरीकरण और समय की कमी को देखते हुए Grain ATM Bihar जैसी व्यवस्था भविष्य में और जरूरी हो जाएगी।

Grain ATM Bihar: बिहार की राशन व्यवस्था में टेक्नोलॉजी की नई शुरुआत
Grain ATM Bihar: बिहार की राशन व्यवस्था में टेक्नोलॉजी की नई शुरुआत

अगर इसे सही ढंग से लागू किया गया, तो यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। डिजिटल इंडिया और फूड सिक्योरिटी जैसे बड़े लक्ष्यों से यह योजना सीधे जुड़ती है।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध सरकारी जानकारी, रिपोर्ट्स और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। योजना के नियम, समयसीमा और क्रियान्वयन में सरकार द्वारा समय-समय पर बदलाव किए जा सकते हैं। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निर्णय से पहले आधिकारिक अधिसूचना और स्थानीय प्रशासन की जानकारी जरूर जांच लें।

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