Ola Battery Teardown: भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विस्तार तेजी से हो रहा है, और इस बदलाव की अगुआई कर रही है Ola Electric। हाल ही में ओला की बैटरी टेक्नोलॉजी को लेकर जो जानकारियाँ सामने आई हैं, वे यह साबित करती हैं कि कंपनी सिर्फ एक वाहन निर्माता नहीं, बल्कि एक गहरी टेक्नोलॉजी-फोकस्ड कंपनी बन चुकी है। Teardown से यह स्पष्ट होता है कि ओला ने न सिर्फ एनर्जी स्टोरेज डिज़ाइन में निवेश किया है, बल्कि EV सेगमेंट में लॉन्ग-टर्म लीडरशिप का रोडमैप भी तैयार किया है।
Ola Battery Teardown: बैटरी आर्किटेक्चर में अनूठा प्रयोग

ओला की बैटरी में उन्नत ली-आयन सेल्स का उपयोग किया गया है, जिनकी बनावट और फॉर्म फैक्टर पूरी तरह से स्कूटर के डिजाइन के अनुसार तैयार की गई है। बैटरी की कुल क्षमता लगभग 4 kWh है, जो कि एक शहरी स्कूटर के लिए पर्याप्त रेंज और परफॉर्मेंस प्रदान करती है। सेल्स की पोजिशनिंग, मॉड्यूलर डिज़ाइन और पावर डिस्ट्रीब्यूशन को इस तरह से तैयार किया गया है कि थर्मल स्टेबिलिटी और एफिशिएंसी बनी रहे।
मॉड्यूल डिज़ाइन में नया दृष्टिकोण
ओला का बैटरी मॉड्यूल दो भागों में विभाजित है, जिससे उसका संचालन बेहतर ढंग से किया जा सकता है। मॉड्यूल के प्रत्येक हिस्से में समान वोल्टेज लेवल बनाए रखने के लिए एडवांस सर्किटिंग और वायरिंग लागू की गई है। इसके अलावा, हर सेल को एक खास दिशा में रखा गया है जिससे हीट फ्लो और इलेक्ट्रिक करंट कंट्रोल में सहायता मिलती है।
इंटरनल वायरिंग और बंधन तकनीक
ओला की बैटरी असेंबली में पारंपरिक वेल्डिंग के बजाय वायर बॉन्डिंग जैसी स्मार्ट तकनीक अपनाई गई है। यह न केवल मैन्युफैक्चरिंग को आसान बनाती है, बल्कि सेफ्टी को भी बेहतर करती है। वायरिंग हार्नेस और पीसीबी लेआउट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि बैटरी के अंदर किसी भी प्रकार की फिजिकल डैमेज या शॉर्ट सर्किट की संभावना बहुत कम हो।
थर्मल मैनेजमेंट में आधुनिक सोच
एक अच्छी बैटरी वही होती है जो लंबे समय तक कूल बनी रहे। ओला की बैटरी में थर्मल इंटरफेस मटीरियल और कूलिंग कॉम्पोज़िट्स का इस्तेमाल किया गया है, जिससे बैटरी का तापमान नियंत्रित रहता है। बैटरी के इनसुलेशन और फ्रेमिंग मटीरियल में थर्मल कंडक्टिव एलिमेंट्स शामिल किए गए हैं ताकि हीट जल्दी से डाइवर्ट हो सके।
बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS): स्मार्ट और भरोसेमंद
ओला का BMS सिस्टम बैटरी की सेहत पर लगातार नज़र रखता है। यह हर मॉड्यूल से डेटा लेकर बैलेंसिंग, चार्जिंग-कंट्रोल और टेम्परेचर मॉनिटरिंग जैसे काम करता है। ओवरहीटिंग, ओवरचार्जिंग और शॉर्ट सर्किट जैसी समस्याओं को रियल-टाइम में डिटेक्ट कर लिया जाता है।
मेक इन इंडिया: लोकल सेल प्रोडक्शन की पहल

ओला अब विदेशों से सेल्स इंपोर्ट करने के बजाय भारत में ही सेल मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में बढ़ रही है। तमिलनाडु में स्थापित हो रही गीगाफैक्ट्री से भारत को EV बैटरी सेल्स के मामले में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। इससे लोकल सप्लाई चेन मजबूत होगी और लागत में भी कमी आएगी।
भविष्य की तैयारी: नई जनरेशन की बैटरियाँ
कंपनी भविष्य में 4680 सेल टेक्नोलॉजी जैसे बड़े फॉर्मेट सेल्स पर काम कर रही है, जो कि उच्च एनर्जी डेंसिटी और बेहतर चार्जिंग साइकल ऑफर करते हैं। इस तरह के सेल्स न सिर्फ लंबी रेंज देते हैं बल्कि उच्च तापमान पर भी बेहतर परफॉर्म करते हैं। ये अगली पीढ़ी की बैटरियाँ भारतीय सड़कों के लिए उपयुक्त साबित होंगी।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें शामिल विचार और जानकारी लेखक के अपने विश्लेषण पर आधारित हैं। यह किसी भी उत्पाद, सेवा या कंपनी का समर्थन या प्रमोशन नहीं करता। उपयोगकर्ता अपने विवेक से इस जानकारी का उपयोग करें। लेख में दी गई तकनीकी जानकारियाँ समय के साथ अपडेट हो सकती हैं, इसलिए निर्णय लेने से पहले नवीनतम स्रोतों की पुष्टि अवश्य करें।
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