हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा और वयस्क साक्षरता के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ULLAS Programme 2026 के अंतर्गत राज्य की साक्षरता दर बढ़कर 99.55 प्रतिशत पहुँच गई है। इस उपलब्धि के लिए हिमाचल प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया।
नई दिल्ली में आयोजित समारोह में हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने राज्य की ओर से सम्मान प्राप्त किया। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय शिक्षकों, विद्यार्थियों, स्वयंसेवकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामूहिक प्रयासों को दिया। ULLAS Programme 2026 के माध्यम से उन वयस्क लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाया गया, जिन्हें पहले औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिला था।
हिमाचल प्रदेश अब 99.7 प्रतिशत साक्षरता वाले गोवा के बाद देश में दूसरे स्थान पर बताया गया है। हिमाचल को 8 सितंबर 2025 को 99.3 प्रतिशत साक्षरता के साथ पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया गया था। अब ULLAS Programme 2026 के तहत यह दर बढ़कर 99.55 प्रतिशत हो गई है। इसकी जानकारी ULLAS की आधिकारिक वेबसाइट और हालिया शिक्षा रिपोर्ट में दी गई है।
ULLAS Programme 2026 क्या है?
ULLAS Programme 2026 केंद्र सरकार का वयस्क शिक्षा और साक्षरता कार्यक्रम है। इसका पूरा नाम Understanding of Lifelong Learning for All in Society है। इसे हिंदी में नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के नाम से भी जाना जाता है। योजना का उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन लोगों को बुनियादी शिक्षा देना है, जो किसी कारणवश स्कूल नहीं जा सके।

केंद्र सरकार ने इस कार्यक्रम को वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक लागू करने की मंजूरी दी थी। ULLAS Programme 2026 केवल अक्षरों और संख्याओं की पहचान तक सीमित नहीं है। इसमें व्यक्ति को दैनिक जीवन में काम आने वाली कार्यात्मक साक्षरता, वित्तीय जानकारी, डिजिटल ज्ञान, स्वास्थ्य जागरूकता और नागरिक कर्तव्यों की समझ देने का भी प्रयास किया जाता है।
इस कार्यक्रम में स्वयंसेवी शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षित नागरिक, विद्यार्थी, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता अपनी इच्छा से नव-साक्षर लोगों को पढ़ा सकते हैं। इस प्रकार ULLAS Programme 2026 सरकार और समाज की भागीदारी से संचालित होने वाला जन-आधारित शिक्षा अभियान है।
| प्रमुख जानकारी | विवरण |
|---|---|
| कार्यक्रम का नाम | ULLAS—नव भारत साक्षरता कार्यक्रम |
| शुरुआत | वर्ष 2022 |
| वर्तमान अवधि | 2022-23 से 2026-27 |
| लक्षित आयु | 15 वर्ष और उससे अधिक |
| प्रमुख लाभार्थी | औपचारिक शिक्षा से वंचित वयस्क |
| हिमाचल की साक्षरता दर | 99.55 प्रतिशत |
| राष्ट्रीय स्थिति | गोवा के बाद दूसरा स्थान |
| सम्मान | अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर राष्ट्रीय पुरस्कार |
ULLAS Programme 2026 में हिमाचल ने कैसे हासिल की सफलता?
हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियाँ शिक्षा अभियान के लिए आसान नहीं हैं। पहाड़ी क्षेत्र, दूर-दराज के गाँव, मौसम और परिवहन की सीमित सुविधाओं के कारण प्रत्येक शिक्षार्थी तक पहुँचना चुनौतीपूर्ण रहता है। इसके बावजूद ULLAS Programme 2026 में स्थानीय शिक्षकों और स्वयंसेवकों ने गाँव-गाँव जाकर गैर-साक्षर लोगों की पहचान की।
राज्य में पंचायतों, स्कूलों, महिला मंडलों और स्थानीय संस्थाओं को साक्षरता अभियान से जोड़ा गया। नव-साक्षर लोगों के लिए उनकी सुविधा के अनुसार कक्षाएँ आयोजित की गईं। कई शिक्षार्थियों को अपने नाम लिखने, सामान्य वाक्य पढ़ने, रुपये का हिसाब करने और मोबाइल पर जरूरी सेवाओं का उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया।
पहले पूर्ण साक्षरता की घोषणा के समय हिमाचल की साक्षरता दर 99.3 प्रतिशत थी। निरंतर प्रयासों से ULLAS Programme 2026 में इसमें और सुधार हुआ तथा दर 99.55 प्रतिशत पहुँच गई। इससे पता चलता है कि पूर्ण साक्षर घोषित होने के बाद भी राज्य ने अभियान को बंद नहीं किया।
ULLAS Programme 2026 में 99.55% साक्षरता का अर्थ
किसी राज्य की साक्षरता दर 99.55 प्रतिशत होने का अर्थ है कि वहाँ निर्धारित आयु वर्ग की लगभग पूरी जनसंख्या बुनियादी रूप से पढ़ने और लिखने में सक्षम है। ULLAS Programme 2026 में साक्षरता को केवल स्कूल की डिग्री या बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने से नहीं जोड़ा जाता।
कार्यक्रम के अंतर्गत नव-साक्षर व्यक्ति की पढ़ने, लिखने और सामान्य गणना करने की क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है। इसके लिए Foundational Literacy and Numeracy Assessment Test जैसी मूल्यांकन प्रक्रिया आयोजित की जा सकती है। सफल शिक्षार्थियों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाता है।
ULLAS Programme 2026 का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है, जब कोई व्यक्ति बैंक का फॉर्म स्वयं भर पाता है, मोबाइल संदेश पढ़ सकता है, दवा पर लिखे निर्देश समझ सकता है अथवा सरकारी योजना से जुड़ी सामान्य जानकारी प्राप्त कर सकता है।

ULLAS Programme 2026 के पाँच प्रमुख घटक
ULLAS Programme 2026 को केवल सामान्य पढ़ाई-लिखाई का अभियान नहीं बनाया गया है। इसमें व्यक्ति के जीवन, काम और सामाजिक भागीदारी से जुड़े पाँच प्रमुख शैक्षणिक घटकों पर ध्यान दिया जाता है।
1. बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान
इसमें अक्षरों की पहचान, शब्दों और सामान्य वाक्यों को पढ़ना, अपना नाम लिखना तथा जोड़-घटाव जैसी सामान्य गणना करना सिखाया जाता है। यह ULLAS Programme 2026 का आधारभूत हिस्सा है।
2. जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण कौशल
नव-साक्षर व्यक्ति को डिजिटल साक्षरता, वित्तीय जानकारी, कानूनी अधिकार, स्वास्थ्य, स्वच्छता, आपदा प्रबंधन और परिवार कल्याण से संबंधित सामान्य जानकारी दी जाती है।
3. बुनियादी शिक्षा
ULLAS Programme 2026 के माध्यम से ऐसे लोगों को शिक्षा के समकक्ष स्तर तक पहुँचने में सहायता दी जाती है, जिन्होंने स्कूली पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी या कभी स्कूल नहीं गए।
4. व्यावसायिक कौशल
लाभार्थियों को रोजगार और आजीविका से जुड़े कौशलों की जानकारी देकर उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का प्रयास किया जाता है। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कौशल गतिविधियाँ अलग हो सकती हैं।
5. सतत शिक्षा
ULLAS Programme 2026 नव-साक्षर व्यक्ति को लगातार पढ़ते रहने के लिए प्रेरित करता है। इसमें पुस्तकालय, कला, संस्कृति, खेल और तकनीक जैसी गतिविधियों से जुड़ने के अवसर दिए जा सकते हैं।
ULLAS Programme 2026 से महिलाओं और बुजुर्गों को लाभ
ULLAS Programme 2026 का सबसे अधिक प्रभाव उन महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ सकता है, जिन्हें बचपन में स्कूल जाने का अवसर नहीं मिला। पढ़ना-लिखना सीखने के बाद वे बैंक, अस्पताल, राशन केंद्र और सरकारी कार्यालयों में अपने काम अधिक आत्मविश्वास के साथ कर सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएँ हस्ताक्षर न कर पाने के कारण जरूरी दस्तावेजों पर अंगूठा लगाती रही हैं। ULLAS Programme 2026 के माध्यम से वे अपना नाम लिखना, मोबाइल संदेश पढ़ना और सामान्य आर्थिक हिसाब करना सीख सकती हैं।
बुजुर्ग व्यक्ति दवा की पर्ची, बस का नंबर, बैंक पासबुक और सरकारी सूचना पढ़ने में सक्षम हो सकता हैं। साक्षरता उन्हें दैनिक कार्यों के लिए दूसरे लोगों पर निर्भर रहने से बचाती है और उनके आत्मसम्मान को बढ़ाती है।
ULLAS Programme 2026 में स्वयंसेवक कैसे जुड़ सकते हैं?
ULLAS Programme 2026 में स्वयंसेवी आधार पर पढ़ाने की व्यवस्था की गई है। इच्छुक व्यक्ति ULLAS मोबाइल ऐप अथवा आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध जानकारी प्राप्त कर सकता है। पंजीकरण और गतिविधियाँ राज्य के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कॉलेज और स्कूल के विद्यार्थी भी अपने आसपास मौजूद गैर-साक्षर वयस्कों को पढ़ाने में सहयोग कर सकते हैं। एक स्वयंसेवक किसी एक या अधिक शिक्षार्थियों को सुविधाजनक समय पर बुनियादी पढ़ाई करा सकता है।
शिक्षार्थियों और स्वयंसेवकों के लिए अध्ययन सामग्री ULLAS के आधिकारिक पोर्टल तथा DIKSHA जैसे डिजिटल माध्यमों पर उपलब्ध कराई जा सकती है। किसी भी पंजीकरण से पहले अपने राज्य के शिक्षा विभाग की वर्तमान प्रक्रिया अवश्य जाँचनी चाहिए।
ULLAS Programme 2026 से अन्य राज्यों को क्या सीखना चाहिए?
हिमाचल प्रदेश की सफलता दिखाती है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद प्रशासन, शिक्षक और समुदाय मिलकर साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। ULLAS Programme 2026 में केवल संख्या बढ़ाने के बजाय प्रत्येक गैर-साक्षर व्यक्ति की पहचान और नियमित शिक्षण जरूरी है।
अन्य राज्य पंचायत स्तर पर लाभार्थियों की सूची तैयार कर सकते हैं, महिला स्वयं सहायता समूहों को अभियान से जोड़ सकते हैं और स्थानीय विद्यार्थियों को स्वयंसेवक बना सकते हैं। नियमित मूल्यांकन और परिणामों की निगरानी से कार्यक्रम की गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है।
हिमाचल प्रदेश का 99.55 प्रतिशत साक्षरता स्तर यह संदेश देता है कि वयस्क शिक्षा उम्र की सीमा से बंधी नहीं है। ULLAS Programme 2026 के माध्यम से पढ़ना-लिखना सीखने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने परिवार और समाज के विकास में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध सरकारी और समाचार सूचनाओं पर आधारित है। साक्षरता दर, कार्यक्रम, पंजीकरण तथा लाभ संबंधी नवीनतम जानकारी के लिए ULLAS और शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट जाँचें।
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