मान लीजिए आप अपने बच्चे की पढ़ाई, घर का खर्च, दवाइयों का बिल और रोजमर्रा की चीजों का हिसाब लगा रहे हैं ऐसे में हर साल बजट आपके जीवन को सीधे प्रभावित करता है। Budget 2026 भी कुछ ऐसा ही है। इस बार सरकार ने युवाओं, मिडिल क्लास और उद्योगों को ध्यान में रखकर कई फैसले लिए हैं।
कुछ चीजें सस्ती होने की उम्मीद है, तो कुछ पर खर्च बढ़ सकता है। सरकार का फोकस इस बार मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थ, एजुकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा दिखा है। खास बात यह है कि विदेशी पढ़ाई और इलाज के लिए पैसा भेजना आसान करने, दवाइयों को सस्ता करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
विदेश पढ़ाई और इलाज हुआ आसान TCS में राहत
अगर आप या आपका परिवार विदेश पढ़ाई या इलाज के लिए पैसा भेजता है, तो यह बजट राहत देने वाला है। सरकार ने LRS के तहत एजुकेशन और मेडिकल खर्च के लिए TCS घटाकर लगभग 5% से 2% करने का प्रस्ताव दिया है। इससे परिवारों को एकमुश्त टैक्स का बोझ कम महसूस होगा और कैश फ्लो बेहतर रहेगा।

इसके अलावा, एजुकेशन लोन से विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर पहले ही TCS हटाया जा चुका है और टैक्स-फ्री सीमा ₹10 लाख तक रखी गई है। इससे मिडिल क्लास परिवारों के लिए विदेशी शिक्षा पहले से ज्यादा किफायती हो सकती है।
सरकार का मकसद साफ है भारतीय छात्रों को ग्लोबल एजुकेशन का मौका देना और मेडिकल खर्च को थोड़ा आसान बनाना। आने वाले वर्षों में यह कदम भारतीय युवाओं की वैश्विक भागीदारी बढ़ाने में मदद कर सकता है।
दवाइयों में राहत और हेल्थ सेक्टर को बड़ा बूस्ट
Budget 2026 में हेल्थ सेक्टर को मजबूत करने के लिए BioPharma Shakti योजना शुरू की गई है, जिसके लिए लगभग ₹10,000 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। इसका उद्देश्य बायोलॉजिक दवाओं और रिसर्च को बढ़ावा देना है।
इसके अलावा, कुछ जरूरी दवाओं पर कस्टम ड्यूटी कम करने और हेल्थ रिसर्च को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया गया है। इससे कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं की कीमत कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। लंबे समय में इसका फायदा दो तरीके से मिलेगा मरीजों का इलाज सस्ता होगा और भारत हेल्थ टेक और बायोफार्मा में मजबूत बन सकता है।
स्पोर्ट्स MSME और मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा फायदा
सरकार ने MSME और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर खास ध्यान दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, स्पोर्ट्स गुड्स और टेक सेक्टर के लिए बड़े फंड और स्कीम्स शुरू की गई हैं। इससे लोकल उत्पादन बढ़ेगा और इंपोर्ट कम होगा।
अगर घरेलू उत्पादन बढ़ता है, तो मोबाइल, बैटरी, फिटनेस गियर और इलेक्ट्रॉनिक सामान सस्ते होने की संभावना रहती है। साथ ही MSME सेक्टर को फंड मिलने से रोजगार भी बढ़ सकता है। यह कदम मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर फोकस
सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च को बढ़ाकर लगभग ₹12.2 लाख करोड़ करने का प्रस्ताव दिया है। इसका असर सड़क, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट सेक्टर पर दिख सकता है।
हाई स्पीड रेल कॉरिडोर, नए वाटरवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क जैसी योजनाएं लंबे समय में भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी। इससे उद्योगों की लागत कम होगी और देश की ग्रोथ तेज हो सकती है।
क्या महंगा हो सकता है हेल्थ हानिकारक चीजों पर सख्ती
सरकार आम तौर पर हेल्थ को नुकसान पहुंचाने वाले प्रोडक्ट्स जैसे सिगरेट, तंबाकू और शराब पर टैक्स बढ़ाने का रुख रखती है। इसका मकसद दो होता है लोगों की सेहत सुधारना और टैक्स कलेक्शन बढ़ाना। लंबे समय में ऐसे फैसले हेल्थ सिस्टम का खर्च कम करने में भी मदद करते हैं।
लेटेस्ट अपडेट और लॉन्ग टर्म असर

Budget 2026 को सरकार ने युवाओं और भविष्य की अर्थव्यवस्था पर फोकस बताते हुए पेश किया है। विदेशी पढ़ाई, हेल्थ, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रा पर जोर आने वाले 10–20 साल की ग्रोथ रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट शॉर्ट टर्म राहत और लॉन्ग टर्म आर्थिक मजबूती दोनों पर काम करता है।
कुल मिलाकर Budget 2026 मिडिल क्लास, छात्रों और इंडस्ट्री के लिए बैलेंस बनाने की कोशिश करता दिखता है। पढ़ाई और इलाज सस्ता हो सकता है, जबकि लोकल मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रा से रोजगार बढ़ सकता है। अगर ये योजनाएं सही तरीके से लागू होती हैं, तो आने वाले सालों में आम लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। बजट से जुड़े नियम समय के साथ बदल सकते हैं। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले आधिकारिक सरकारी दस्तावेज या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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